Agra News: आगरा के लोगों के लिए लंबे समय से इंतजार उत्तरी बाईपास आखिरकार खोल दिया गया है। सात महीनों से लटका यह प्रोजेक्ट अब पूरी तरह चालू हो चुका है। इसके शुरू होने के साथ ही खंदौली, हाथरस और यमुना एक्सप्रेसवे की दिशा में सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा। 14 किलोमीटर लंबा यह बाईपास न केवल समय बचाएगा, बल्कि सिकंदरा चौराहे पर लगने वाले जाम को कम करेगा।
उत्तरी बाईपास का निर्माण लगभग 400 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। यह प्रोजेक्ट नेशनल हाइवे.19 के रैपुरा जाट तिराहे से मिडावली हाथरस तक तैयार किया गया है। पहले दिन ही हजारों वाहनों ने इस मार्ग पर आवाजाही की, जिससे लोगों में राहत नजर आई।
यात्रा समय में बड़ी कटौती: अब खंदौली 15 मिनट और हाथरस 25 मिनट में
नए बाईपास की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसने यात्रा समय को आधा कर दिया है। रैपुरा जाट से खंदौली पहुंचने में सिर्फ 15 मिनट का समय लगेगा। वहीं हाथरस की दूरी 25 मिनट में पूरी होगी। बाईपास चालू होने से पहले इस दूरी को तय करने में 30 से 50 मिनट का समय लगता था, साथ ही सिकंदरा चौराहे पर जाम की समस्या आम बात थी। अब वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की भी बचत होगी।
Agra News: हाईटेंशन लाइन बनी थी सबसे बड़ी बाधा
31 मार्च तक काम पूरा होना था, लेकिन हाईटेंशन लाइन की कम ऊंचाई के कारण निर्माण कार्य बीच में रुक गया। दो महत्वपूर्ण स्थानों पर लाइन को बढ़ाना जरूरी था, अन्यथा बड़े वाहनों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो सकती थी। तीन महीने की देरी के बाद लाइनों को 11 मीटर ऊंचा किया गया। आखिरकार मंगलबार दोपहर 12 बजे हाइवे के चैनल नंबर 174 को यमुना एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 141 से जोड़कर बाईपास को चालू कर दिया गया। इस तकनीकी अड़चन के दूर होने ही पूरा मार्ग सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया।
यमुना एक्सप्रेसवे से सीधा कनेक्शन – NCR जाने वालों को बड़ी राहत
उत्तरी बाईपाई की एक और बड़ी सुविधा यह है कि इसे यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ दिया गया है। इससे आगरा शहर में प्रवेश किए बिना ही वाहन सीधे दिल्ली-नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ओर जा सकेंगे। यह कनेक्शन न केवल ट्रैफिक को विभाजित करेगा बल्कि समय, ईंधन और तनाव तीनों में राहत पहुंचाएगा।

तीन प्रस्तावों के बाद मिली मंजूरी 15 साल पुराना सपना हुआ पूरा
उत्तरी बाईपास का विचार नया नहीं है। इसका सपना लगभग डेढ़ दशक पहले देखा गया था। इसके लिए वर्षों में तीन अलग-अलग प्रस्ताव बनाए गए:
पहला प्रस्ताव
इसमें बाईपास को आगरा शहर के भीतर से जोड़ा जाना था, लेकिन व्यस्त आबादी को देखते हुए इसे बदलना पड़ा।
दूसरा प्रस्ताव
इसमें सिकंदरा चौराहे का दबाव कम करने का विचार था, लेकिन इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
तीसरा प्रस्ताव
एनएचएआई आगरा खंड ने नया सर्वे किया और नई दिल्ली कार्यालय भेजा। छह महीने बाद इसकी मंजूरी मिली और तुरंत टेंडर जारी किया गया। 2022 में निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हुआ और अब 2025 में जाकर यह पूरा हो गया।
आगरा की ट्रैफिक व्यवस्था को मिला नया आयाम
उत्तरी बाईपास का खुलना आगरा के ट्रैफिक सिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल यात्रा को सुकून बनाएगा, बल्कि शहर के भीतर प्रदूषण और जाम दोनों को कम करेगा। यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद इसका महत्व और बढ़ गया है। आने वाले समय में यह मार्ग एनसीआर और आगरा के बीच तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक कनेक्टिविटी का अहम दोस्त बनेगा।
लोगों में उत्साह, पहले दिन ही हजारों वाहन गुजरे
बाईपास शुरू होने ही स्थानीय लोगों में खुशी की लहर देखी गई। पहले दिन ही एक हजार से अधिक वाहनों ने नया मार्ग इस्तेमान किया। ट्रक ड्राइवरों और बस संचालनों ने बताया कि अब आगरा शहर के जाम से मुक्ति मिलेगी और सामान और सवारियों को समय पर पहुंच सकेंगे।
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