Agra Crime: आगरा में हनी ट्रैप कर लोगों से लाखों रूपये ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश कुछ दिन पहले ही किया था। इस केस में एक और सदस्य कानपुर में तैनात यूपी पुलिस के सिपाही को गिरफ्तार किया है। सिपाही का नाम रियाजउद्दीन बताया जा रहा है इस केस में पहले ही एक महिला और एक आदमी को जेल भेजा चुके है। और अभी भी दो आरोपी फरार है। जो लंबे समय से मिलकर लोगों को जाल में फंसा रहे थे।
शुरुआत एक मिस्ड कॉल से हुई
कमला नगर व्यक्ति के मोबाइल पर अचानक एक मिस्ड कॉल आई। उसने कॉल बैक किया तो दूसरी तरह से एक युवती थे। बातचीत धीरे-धीरे बढ़ी और दोनों के बीच संपर्क लगातार बना रहा। कुछ ही दिनों में पीड़ित को अपने साथ डिनर करने के लिए बुलाया। युवती ने विश्वास बना लिया था, इसीलिए पीड़ित उसके बताए स्थान पर चला गया। पीड़ित का दावा है कि डिनर के दौरान उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला दिया गया, जिससे वह बेहोश हो गया।
कुछ दिन बाद आया ब्लैकमेलिंग का फोन
एक व्यक्ति ने खुद को प्रवेश बताकर पीड़ित को फोन किया और कहा कि उसके पास युवती के साथ अश्लील वीडियो है। उसने धमकी दी कि वह वीडियो वायरल कर देगा और उसी युवती ने उसके खिलाफ रेप का केस करने की शिकायत भी तैयार का ली है। उसने कहा 20 लाख रूपये दे दो, नहीं तो यूंही फर्जी रेप केस में फंसा दूंगा। पहले तो पीड़ित डर गया, लेकिन जब उसने रकम देने से साफ इंकार किया, तो आरोपियों ने अगला खेल शुरू किया।
फर्जी नाम से थाना पहुंची महिला
युवती तुरंत एक फर्जी नाम से थाने पहुंची और रेप की शिकायत दर्ज कर दी। पुलिस के सामने मामला गंभीर था, लेकिन उधर आरोपियों ने पीड़ित पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आखिरकार दबाव और बदनामी के डर से पीड़ित 4 लाख रूपये में समझौते के लिए तैयार हो गया। समझौता पत्र बनवाया गया, लेकिन यहीं गिरोह की सबसे बड़ी गलती हो गई। समझौते पत्र में दर्ज आधार कार्ड पर मौजूद फोटो युवती के असली चेहरे से मिलता-जुलता नहीं था। पुलिस ने शक के आधार पर जब यह तथ्य नोट किया, तो पूरा खेल धीरे-धीरे खुलने लगा।
Agra Crime: पुलिस जांच में सच सामने आया
पुलिस ने जब महिला से शक्ति से पूछताछ की तो सच्चाई सामने आने लगी। युवती के पास से मिला मोबाइल की जांच में उसके पास कई लोगों के वीडियो और चैट मिले, जो साफ बता रहे थे कि यह कोई पहली घटना नहीं थी। महिला ने बताया कि वह असल हानि ट्रैप और ब्लैकमेलिंग गिरोह का हिस्सा है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह अपने मामा के घर में रह रही थी और मूल रूप से मैनपुरी की रहने वाली है। वह ऑनलाइन गेम में पैसे हार चुकी थी आर्थिक तंगी में फंसकर इस गिरोह का हिस्सा बन गई थी।
यूपी पुलिस का सिपाही भी शामिल निकला
जांच में जैसे-जैसे परतें खुलती गई, पुलिस के हाथ बड़े नाम लगे। महिला की पहचान प्रविंद्र नाम के युवक से हुई थी। प्रविंद्र ने ही उसे रियाज नाम के व्यक्ति से मिलवाया था, जो खुद को यूपी पुलिस का सिपाही बताता था। रियाज पहले कानपुर में तैनात था और कुछ समय आगरा में भी उसकी पोस्ट रही थी। पुलिस ने जब जांच की तो पाया कि रियाज वाकई यूपी पुलिस का सिपाही है। उसने पूरी योजना में महिला और अन्य साथियों की मदद की थी। पुलिस ने सिपाही रियाज को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि गिरोह के दो सदस्य प्रवेश और प्रविंद्र अभी भी फरार है।
डीसीपी सिटी का बयान
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि हनी ट्रैप करने वाले गैंग ने कमला नगर क्षेत्र के एक आदमी को अपने जाल में फसाया था। गैंग ने पहले अनजान नंबर से मिस्ड कॉल किया जाता था। कॉल बैक करने पर युवती को सामने लाया जाता था। धीरे-धीरे बातचीत कर युवती भरोसा बनाती थी और फिर मिलने के लिए बुलाती थी। फिर नशीला पदार्थ मिलकर युवक को खिला देते थे फिर बाद में वीडियो या फोटो दिखाकर डराया जाता था। बाद में रेप जैसी गंभीर शिकायत डालकर पीड़ित को कोर्ट-कचहरी और बदनामी के डर में डाल जाता था, ताकि वह जल्दी से जल्दी रकम देने को मजबूर हो जाए।
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