Agra Crime: आगरा के सिकंदरा क्षेत्र स्थित रोज़र शू इंडस्ट्री में करोड़ों रुपये की सनसनीखेज चोरी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस हाई प्रोफाइल चोरी की वारदात को अंजाम देने वाला कोई बाहरी शातिर अपराधी नहीं, बल्कि फैक्ट्री में ही काम करने वाला कंप्यूटर ऑपरेशन सुपरवाइजर निकला। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से भारी मात्रा में नगदी व डायमंड ज्वेलरी बरामद की गई है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने गर्लफ्रेंड के साथ बेंगलुरु में नई जिंदगी शुरू करने के इरादे से इस बड़ी चोरी की योजना बनाई थी। चोरी की कुल रकम लगभग 7.70 करोड़ रूपये बताई जा रही है, जिसमें से लगभग पूरा माल पुलिस ने रिकवर कर लिया है।
प्रेस वार्ता में पुलिस आयुक्त ने दी जानकारी
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में इस सनसनीखेज चोरी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि रोजर शू इंडस्ट्री में हुई करोड़ों की चोरी के मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 66.33 लाख रूपये नकद, लगभग चार किलो सोने की ज्वेलरी, साढ़े पांच किलो चांदी और कीमती डायमंड ज्वेलरी बरामद की गई है। पुलिस के मुताबिक चोरी की गई लगभग पूरा माल रिकवर कर लिया गया है।
फैक्ट्री का कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड अनुपम शर्मा है, जो रोजर शू इंडस्ट्री में कंप्यूटर ऑपरेशन सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। वह बाह तहसील के गांव बटेश्वर का निवासी है। अनुपम शर्मा ने अपने भाई अनुराग शर्मा और दोस्त संजय सिंह निवासी गांव कल्याणपुर, भरतपुर (राजस्थान) के साथ मिलकर इस चोरी की योजना बनाई थी। तीनों ने फैक्ट्री की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी सिस्टम की पूरी रेकी पहले से कर रखी थी।
कैसे सामने आई चोरी की जानकारी
घटना 18 जनवरी की रात की है। 19 जनवरी की सुबह फैक्ट्री के कर्मचारियों ने मालिक दीपक बुद्धिराजा को सूचना दी कि फैक्ट्री के फर्स्ट फ्लोर पर बने गेट और अलमारियों के ताले टूटे हुए है। जब फैक्ट्री मालिक मौके पर पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। ऑफिस में बने लॉकर से नकदी और कीमती ज्वेलरी गायब थी। इसके बाद तुरंत थाना सिकंदरा में अज्ञात चोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
Agra Crime: CCTV कैमरों से हुआ बड़ा खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त के निर्देश पर डीसीपी अली अब्बास और एसीपी अक्षय माहेश्वरी के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, जिससे आरोपियों की पहचान हो गई। पुलिस ने 22 जनवरी को तीनों आरोपियों को गोल चक्कर चौराहे के पास जऊपुरा, पनवारी जाने वाले कच्चे रास्ते से गिरफ्तार कर लिया।
मालिक को लॉकर में कैश और ज्वेलरी रखते देख बनाई योजना
पुलिस पूछताछ में मास्टरमाइंड अनुपम शर्मा ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसने फैक्ट्री मालिक को ऑफिस के लॉकर में भारी मात्रा में कैश और ज्वेलरी रखते हुए देख लिया था। इसके बाद उसने यह बात अपने भाई और दोस्त को बताई। तीनों ने मिलकर चोरी की पूरी प्लानिंग की, जिसमें एंट्री पॉइंट, कैमरे बंद करने और बाहर निगरानी रखने तक की योजना बनाई।
पाइप के सहारे फैक्ट्री में घुसा मास्टरमाइंड
अनुपम शर्मा ने बताया कि वह फैक्ट्री के पीछे के रास्ते से दीवार पर लगे अर्थिंग पाइप के सहारे टीनशेड पर चढ़ा और वहां से पहली मंजिल पर पहुंच गया। पहली मंजिल के पीछे की साइड का शीशा तोड़कर वह फैक्ट्री के अंदर घुसा। इसके बाद उसने मालिक के ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरे का मुंह ऊपर की ओर कर दिया, ताकि उसकी गतिविधियां कैमरे में कैद न हो सकें।

बाहर भाई और दोस्त कर रहे थे निगरानी
इस दौरान भाई अनुराग शर्मा और दोस्त संजय सिंह फैक्ट्री के बाहर मौजूद रहकर आसपास लगे कैमरों और रास्तों पर नजर रख रहे थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई कर्मचारी या चौकीदार मौके पर न पहुंचे। अनुपम ने ऑफिस का लॉकर तोड़कर उसमें रखी नकदी और ज्वेलरी को एक बड़े बैग में भरा और उसी रास्ते से फैक्ट्री से बाहर निकल गया।
रविवार की रात को क्यों चुनी वारदात
पुलिस के अनुसार, अनुपम शर्मा लंबे समय से फैक्ट्री में काम कर रहा था और उसे फैक्ट्री के अंदरूनी रास्तों, सुरक्षा व्यवस्था और चौकीदारों की ड्यूटी टाइमिंग की पूरी जानकारी थी। रविवार को अधिकतर स्टाफ की छुट्टी रहती थी, इसी कारण तीनों ने रविवार की रात को ही चोरी को अंजाम देने की योजना बनाई थी।
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