Agra Crime: आगरा में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें व्हाट्सएप के जरिए फर्जी APK फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल फोन हैक लिए जा रहे थे। थाना साइबर क्राइम आगरा की टीम ने इस गिरोह का खुलासा करते हुए मध्यप्रदेश के दो युवकों को गिरफ्तार लिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बैंक खातों से लाखों रूपये की ठगी को अंजाम दिया और रकम को अलग-अलग खातों के जरिए ट्रांसफर कर क्रिप्टोकारेंसी में निवेश किया।
ऐसे रचते थे ठगी की साजिश
साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार आरोपी पहले विभिन्न बैंकों से जुड़े चेकबुक, एटीएम कार्ड और रजिस्टर्ड सिम कार्ड हासिल करते थे। इसके बाद ये लोग व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी APK फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड कर इंस्टॉल करता, मोबाइल का पूरा एक्सेस आरोपियों के हाथ में चला जाता था। मोबाइल का नियंत्रण मिलते ही आरोपी बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी और अन्य जरूरी जानकारियों तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद खाते से रकम निकालकर संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह ने करीब 70 से 80 बैंक खातों का उपयोग कर 80 से 90 लाख रुपये तक की ठगी की है।
एक पीड़ित से 15 लाख की निकासी
जांच के दौरान सामने आया कि एक मामले में पीड़ित के बैंक खाते से लगभग 15 लाख रुपये निकाल लिए गए। रकम कई खातों में बांटकर ट्रांसफर की गई, जिससे ट्रांजेक्शन को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। बाद में इस धनराशि को क्रिप्टो करेंसी में निवेश कर दिया गया, ताकि उसका जानकारी छिपाया जा सके। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना एक्टिव हुआ और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन मध्यप्रदेश में ट्रेस की गई। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को कैसे मिला सुराग
साइबर टीम ने मोबाइल डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल और आईपी एड्रेस की मदद से जांच आगे बढ़ाई। कई संदिग्ध खातों की जानकारी जुटाई गई और उनके संचालन से जुड़े लोगों की पहचान की गई। डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों को चिन्हित किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह संगठित तरीके से काम करता था और अलग-अलग राज्यों में खातों का इस्तेमाल करता था। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।
लोगों को दी गई सतर्कता की सलाह
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आई APK फाइल या लिंक को डाउनलोड न करें। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही मोबाइल एप्लिकेशन इंस्टॉल करें। इसके अलावा, बैंक से जुड़े ओटीपी, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। फर्जी APK फाइल के जरिए मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जिससे फोन का पूरा नियंत्रण साइबर अपराधियों के पास चला जाता है। ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
आगरा सहित देश के कई शहरों में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। तकनीक के दुरुपयोग के कारण ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। व्हाट्सएप, सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से लोगों को झांसा देकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग बेहद जरूरी है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में दी जानी चाहिए।
आगे की कार्रवाई (Agra Crime)
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए है। पुलिस इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है, ताकि अन्य पीड़ितों और लेन-देन का पता लगाया जा सके। साइबर क्राइम थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया है। जांच के दौरान यदि अन्य राज्यों से जुड़े कनेक्शन सामने आते है तो सभी एजेंसियों से भी संपर्क किया जाएगा।
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