Agra Metro News: शहर में तेजी से आगे बढ़ रहे आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत अब एक बड़ा तकनीकी काम शुरू होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) की ओर से एमजी रोड पर मेट्रो ट्रैक के लिए 65 मीटर लंबा स्टील गर्डर लगाने की तैयारी की जा रही है। यह गर्डर आगरा मेट्रो परियोजना का अब तक का सबसे लंबा स्टील गर्डर माना जा रहा है। हालांकि इस काम को शुरू करने से पहले रेलवे से अंतिम अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा।
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार यह लंबा स्टील गर्डर कलेक्ट्रेट तिराहा से छीपीटोला चौराहा के बीच स्थापित किया जाएगा। इस क्षेत्र में मेट्रो ट्रैक को रेलवे लाइन के ऊपर से गुजारा जाना है, इसीलिए यहां विशेष डिजाइन वाले स्टील गर्डर का उपयोग किया जाएगा। यह काम तकनीकी रूप से काफी कठिन माना जाता है और इसके लिए अलग-अलग मशीनों और विशेषज्ञ टीम की जरूरत पड़ती है।
रेलवे से अनुमति का इंतजार (Agra Metro News)
आगरा मेट्रो परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि स्टील गर्डर का डिजाइन पहले ही तैयार करके रेलवे विभाग को भेज दिया गया था। अब रेलवे से इसकी अंतिम स्वीकृति मिलने का इंतजार है। उम्मीद है कि इसी सप्ताह रेलवे की ओर से अनुमति मिल सकती है। अनुमति मिलते ही निर्माण एजेंसियां तुरंत काम शुरू कर देंगी। रेलवे लाइन के ऊपर से मेट्रो ट्रैक ले जाने के लिए विशेष सावधानियां बरती जाती हैं। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ही इस तरह के गर्डर लगाए जाते हैं, ताकि रेलवे संचालन पर किसी प्रकार का असर न पड़े और निर्माण कार्य भी सुरक्षित तरीके से पूरा हो सके।
दो से तीन हिस्सों में रखा जाएगा गर्डर
मेट्रो परियोजना से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार 65 मीटर लंबा स्टील गर्डर एक ही बार में स्थापित करना संभव नहीं होता। इसलिए इसे दो या तीन हिस्सों में तैयार करके साइट पर जोड़ा जाएगा। इसके बाद भारी क्रेन और मशीनों की मदद से इसे पिलर के ऊपर स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा भगवान टॉकीज चौराहा क्षेत्र में भी करीब 62 मीटर लंबा स्टील गर्डर लगाने की योजना बनाई गई है। यह भी आगरा मेट्रो परियोजना के दूसरे कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
16 किलोमीटर लंबा होगा दूसरा कॉरिडोर
आगरा मेट्रो का दूसरा कॉरिडोर लगभग 16 किलोमीटर लंबा होगा। यह कॉरिडोर एमजी रोड से होकर गुजरेगा और शहर के कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ेगा। इस कॉरिडोर के निर्माण के दौरान कई जगहों पर रेलवे लाइन, पानी की पाइपलाइन और सीवर लाइन जैसी बाधाएं भी सामने आ रही हैं। इसी कारण निर्माण कार्य को तरीके से पूरा किया जा रहा है। जहां-जहां पिलर बनाए जा रहे हैं, वहां पहले जमीन की खुदाई, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद भारी मशीनों की मदद से पिलर और गर्डर स्थापित किए जाते हैं।
सामान्य मेट्रो से अलग होगा यह गर्डर
मेट्रो परियोजनाओं में आमतौर पर 20 से 25 मीटर लंबाई के स्टील गर्डर का उपयोग किया जाता है, लेकिन आगरा मेट्रो में लगाया जाने वाला यह गर्डर उससे कहीं अधिक लंबा होगा। इसकी लंबाई करीब 65 मीटर, चौड़ाई 5 से 7 मीटर और वजन लगभग 650 टन बताया जा रहा है। इतने भारी और लंबे गर्डर को लगाने के लिए विशेष तकनीक और मजबूत मशीनों की आवश्यकता पड़ेगी। यही कारण है कि इसे लगाने के लिए अलग से मशीनें मंगाई जा रही हैं और पूरी प्रक्रिया की निगरानी विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम करेगी।
आगरा में ही तैयार किया जाएगा स्टील गर्डर
मेट्रो अधिकारियों के अनुसार इस स्टील गर्डर को आगरा में ही तैयार किया जाएगा। इसके लिए निर्माण स्थल के पास ही विशेष व्यवस्था की जा रही है। यहां गर्डर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर अंतिम हिस्सा तैयार की जाएगी। इसके बाद इसे पिलर के ऊपर स्थापित किया जाएगा। संयुक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) ने बताया कि रेलवे से अनुमति मिलने के बाद काम तेजी से शुरू किया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं।
शहर के यातायात पर पड़ेगा असर
इस मेट्रो परियोजना के इस काम के दौरान एमजी रोड और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था में कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं। भारी मशीनों और निर्माण कार्य के चलते ट्रैफिक को डायवर्ट करने की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। हालांकि मेट्रो परियोजना पूरी होने के बाद आगरा शहर की यातायात व्यवस्था को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे शहर के प्रमुख इलाकों के बीच यात्रा का समय कम होगा और पर्यटकों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
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