Agra news: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ( UFBU ) के आह्नान पर मंगलवार को आगरा में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अखिल भारतीय बैंक हड़ताल के तहत जोरदार प्रदर्शन किया। शहर के प्रमुख व्यवसायिक केंद्र संजय प्लेस में बड़ी संख्या में बैंक कर्मी एकत्र हुए और एलआईसी बिल्डिंग के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल का असर सार्वजनिक, निजी, विदेशी, ग्रामीण और सहकारी बैंकों पर साफ तौर पर देखने को मिला।
सुबह से ही कई बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे, जिससे ग्राहकों को नगद लेन-देन, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि एटीएम सेवाएं अधिकांश स्थानों पर सामान्य रही।
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह प्रमुख
बैंक यूनियनों का कहना है कि वर्ष 2015 में हुए द्विपक्षीय समझौतों और 7 दिसंबर 2023 को भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ हुए समझौते में पांच दिवसीय बैंकिंग कार्य सप्ताह को लेकर सहमति बनी थी। इसके तहत हर शनिवार बैंक बंद रखने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को ही बैंक बंद रहते हैं, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है।
संजय प्लेस में हुआ विशाल प्रदर्शन
हड़ताल के दौरान संजय प्लेस स्थित एलआईसी बिल्डिंग पर आयोजित प्रदर्शन में सैकड़ों बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करो कर्मचारियों का शोषण बंद करो जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आम जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि बैंकिंग सेक्टर में कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ है।
जनता से सहयोग की अपील
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से स्पष्ट किया गया कि हड़ताल का उद्देश्य ग्राहकों को परेशान करना नहीं है। यूनियन नेताओं ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए बैंकिंग सेवाओं में हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया। नेताओं का कहना था कि बैंक कर्मचारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यदि उनके हितों की अनदेखी की जाएगी, तो इसका असर पूरे बैंकिंग सिस्टम पर पड़ेगा।
प्रमुख वक्ताओं ने रखे विचार
प्रदर्शन के दौरान प्रमुख रूप से पंकज शर्मा, शैलेन्द्र झा, होशियार सिंह सहित कई यूनियन पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि बैंकिंग उद्योग में स्टाफ की भारी कमी है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों पर लगातार काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है। आईबॉक के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित सहगल ने कहा कि यह हड़ताल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लाबित मांगों को लेकर की गाई है। मुख्य मांगों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना, सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करना और करचारियों पर बढ़ने कार्यभार को कम करना शामिल है।
अखिल भारतीय स्तर पर असर
यह हड़ताल केवल आगरा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में इसका असर देखने को मिला। सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और भारतीय बैंक की मांगों पर जल्दी निर्णय नहीं लिया, तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आगरा में बैंक करचारियों की हड़ताल ने एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में कामकाजी हालात और कर्मचारियों की मांगों को सुर्खियों में ला दिया है। पांच दिवसीय बैंकिंग कार्य सप्ताह को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग अब निर्णायक मोड पर पहुंचती नजर आ रही है अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग बैंक कर्मचारियों की मांगों पर कब और क्या फैसला लेते है।
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