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Agra News: आगरा पुलिस बनी फाइनेंस कंपनी की रिकवरी एजेंट, 25 हजार लेने का आरोप

Published On: February 20, 2026
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Agra News: शाहगंज में जेसीपी मालिक फाइनेंस मामला
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Agra News: आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र में फाइनेंस कंपनी के बकाए की वसूली को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। आरोप है कि एक जेसीबी संचालक को घर से उठाकर करीब 12 घंटे तक थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और बाद में 25 हजार रूपये लेने के बाद छोड़ा गया। पीड़ित की शिकायत पर डीसीपी सिटी ने संबंधित सिपाही को लाइन हाजिर कर मामले की जांच के आदेश दे दिए है।

क्या है पूरा मामला

शाहगंज निवासी एक युवक ने कुछ साल पहले जेसीबी मशीन खरीदी थी, जिस पर उसने फाइनेंस कराया था। युवक का कहना है कि फाइनेंस कंपनी की कुछ किस्तें बकाया रह गई थी। इसी को लेकर कंपनी के कर्मचारी उसे लगातार फोन कर दबाव बना रहे थे। पीड़ित का आरोप है कि उसने दो फरवरी को पुलिस से भी शिकायत की थी कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी उसके साथ अभद्रता और धमकी दे रहे है, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आरोप के मुताबिक सात फरवरी की दोपहर शाहगंज थाने का एक सिपाही एक दारोगा के साथ उसके घर पहुंचा और उसे थाने चलने को कहा। युवक का कहना है कि बिना किसी लिखित शिकायत और नोटिस के उसे थाने लाया गया। यहां उसे करीब 12 घंटे तक बैठाए रखा गया। परिजनों को भी इस बात की जानकारी नहीं दी गई।

25 हजार रूपये लेने के बाद छोड़ा

पीड़ित ने आरोप लगाया है कि देर रात करीब 11:30 बजे तीसरे व्यक्ति के माध्यम से 25 हजार रुपये ऑनलाइन मंगवाए गए। रकम मिलने के बाद उसे छोड़ा गया। युवक ने इस पूरे घटनाक्रम को अवैध हिरासत और जबरन वसूली बताया है। उसने बुधवार को डीसीपी सिटी से मिलकर लिखित शिकायत दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सिटी ने संबंधित सिपाही को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया। साथ ही पूरे मामले की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी को सौंप दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि युवक को बिना किसी औपचारिक प्रक्रिया के थाने में बैठाया गया था।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

डीसीपी सिटी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर त्वरित संज्ञान लिया गया है। संबंधित सिपाही को लाइन भेजा गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। यदि जांच में अन्य पुलिसकर्मियों शामिल होते है तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इस मामले में अभी तक इंस्पेक्टर या बीट दारोगा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि थाने की जानकारी के बिना किसी व्यक्ति को 12 घंटे तक कैसे हिरासत में रखा गया। क्या यह कार्रवाई उच्चाधिकारियों की जानकारी में थी या नहीं, यह जांच का विषय बना हुआ है।

फाइनेंस कंपनियों की वसूली पर बहस

यह मामला फाइनेंस कंपनियों की वसूली प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा में है। अक्सर किस्तें बकाया होने पर एजेंट ग्राहकों पर दबाव बनाते हैं। कई बार अभद्रता और धमकी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए, न कि किसी एक पक्ष के दबाव में। यदि जांच में यह साबित होता है कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने पुलिस के माध्यम से दबाव बनवाया, तो यह भी गंभीर विषय होगा। इससे वसूली के नाम पर अवैध तरीकों के इस्तेमाल की आशंका बढ़ती है।

पीड़ित की मांग (Agra News)

पीड़ित युवक ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उसने यह भी कहा कि उसे मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा है। परिवार के सदस्यों ने भी घटना को लेकर नाराजगी जताई है। पीड़ित का कहना है कि यदि उसने बकाया किस्त नहीं चुकाई थी तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। पुलिस द्वारा उठाकर थाने में बैठाना और फिर पैसे लेने के बाद छोड़ना कानून का दुरुपयोग है।

एसीपी स्तर पर शुरू हुई जांच में थाने की जीडी, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यह भी देखा जाएगा कि युवक को किस आधार पर थाने लाया गया और कितनी देर तक रखा गया। यदि अवैध हिरासत और वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई संभव है।

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Manoj Sharma

मनोज शर्मा एक डिजिटल न्यूज़ राइटर हैं, जो आगरा और उत्तर प्रदेश की ताज़ा खबरें, क्राइम अपडेट्स और स्थानीय मुद्दों पर लिखते हैं। इनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है।

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