Agra News: आगरा मेट्रो परियोजना में सामने आ रही लगातार लापहरवाहियों और उससे हो रहे हादसों के बाद अब मामला कानूनी स्तर तक पहुंच गया है। मेट्रो निर्माण कार्य में बरती गई कथित लापरवाही के चलते हुए एक सड़क हादसे को लेकर आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट के डायरेटर को नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस में घायल अधिवक्ता ने तीन लाख रूपये के मुआवजे की मांग की है।
घटना को लेकर अधिवक्ता का कहना है कि मेट्रो प्रशासन और निर्माण एजेंसी की ओर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, जिससे पूरी जिम्मेदारी मेट्रो प्रोजेक्ट प्रबंधक की बनती है।
खुले कट और पत्थरों से बाद रहा खतरा
विधिक नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आगरा मेट्रो के निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर खुले कट छोटे गए है। इन कटो के पास बड़े-बड़े पत्थर और निर्माण सामग्री बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के रखी गई। यही लापरवाही आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। शहर के व्यस्त मार्गों पर बिना संकेतक, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड के निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ वाहन चालकों की जान को खतरा बना हुआ है।
28 नवंबर 2025 को हुआ हादसा
नोटिस के अनुसार यह हादसा 28 नवंबर 2025 को हुआ। घायल अधिवक्ता चौधरी समीर एडवोकेट आगरा कैंट से अपने घर लौट रहे थे। जब वह प्रतापपुरा और कमिश्नर ऑफिस के बीच मेट्रो निर्माण स्थल के पास पहुंचे, तभी अचानक एक मेट्रो कर्मचारी सिर पर सामान रखकर खुले कट से बाहर निकल आया। अचानक सामने आए कर्मचारी को बचाने के लिए अधिवक्ता ने तुरंत ब्रेक लगाकर अपनी कार को दाई ओर मोड़ा। इससे कर्मचारी की जान तो बच गई, लेकिन कार सड़क किनारे रखे भारी पत्थरों से जा टकराई।
अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल
इस टक्कर में अधिवक्ता चौधरी समीर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे में उनकी कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घायल अधिवक्ता का कहना है कि यदि मेट्रो निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, खुले कट को ढका गया होता और उचित चेतावनी संकेत लगे होते, तो यह दुर्घटना कभी नहीं होती।
इलाज और कार मरम्मत का खर्च
विधिक नोटिस में बताया गया है कि इलाज पर करीब दो लाख रूपये खर्च हुए है। इसके अलावा कार की मरम्मत पर लगभग एक लाख रूपये का खर्च आया है। इसके साथ ही 11 हजार रूपये नोटिक शुल्क के रूप में भी मांगे गए है। इस तरह कुल मिलाकर तीन लाख रूपये की क्षतिपूर्ति की मांग आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट के डायरेक्टर से की गई है।
बार एसोसिएशन का समर्थन
यह विधिक नोटिस वरिष्ठ राजन बाबू स्वामी, अध्यक्ष, सुप्रीम अगर बार एसोसिएशन की ओर से, उनके पक्षकार चौधरी समीर एडवोकेट के माध्यम से भेजा गया है। बार एसोसिएशन ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए मेट्रो प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते करवाई नहीं की गई तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते है।
मुआवजा न मिलने पर आगे की कार्रवाई
विधिक नोटिस में साफ किया गया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर मुआवजा नहीं दिया गया तो आगे न्यायालय की शरण ली जाएगी। ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिवक्ता ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत क्षति का नहीं है, बल्ली सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
Agra News: मेट्रो प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले पर फिलहाल आगरा मेट्रो प्रशासन की ओर से कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, नोटिस मिलने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि मेट्रो प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस योजना बनाई जाती है या नहीं।
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