Agra News: गुरुवार की रात पुलिस और ANTF की संयुक्त टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की। यह कार्रवाई बिल्कुल फिल्मी सी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह जमीन पर हुई एक वास्तविक घटना है। पुलिस ने हाइवे पर घेराबंदी करते हुए एक पंजाब नंबर की कार से 10 किलो चरस बरामद की है, जिसकी कीमत लभभग 1 करोड़ रूपये बताई जा रही है।
Agra News: खबर कैसे शुरू हुई?
DCP सिटी सैयद अली अब्बास को एक मुखबिर ने महत्पूर्ण जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश से आने वाला चरस का बड़ा कंसाइनमेंट आगरा के रस्ते होते हुए फिरोजाबाद की ओर भेजा जा रहा है। जानकारी इतनी संवेदनशील थी तत्काल ANTF को अलर्ट किया गया और कमला नगर पुलिस ने घेराबंदी की। पुलिस टीम ने पूरी तैयारी के साथ साढ़े 9 बजे के करीब आगरा-फिरोजाबाद हाइवे पर नाका बंदी शुरू कर दी। इसी दौरान तेज गति से आती हुई एक पंजाब नंबर की अर्टिगा कार पुलिस को आती हुई नजर आई। कार को रोकने पर दो लोग कार में बैठे थे।
इसमें पंजाब संगरूर के रहने वाले बलबीर सिंह और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के रहने वाले धर्मवीर राणा थे पहले तो दोनों ने खुद को साधारण यात्री बताते की कोशिश की और कहा कि वे फिरोजाबाद जा रहे है। लेकिन पुलिस को उनके जवाबों में बैचेली झिझक नगर आई। पूछताछ सख्त होते ही दोनों टूट गए और उन्होंने स्वीकार कर लिया कि कार में चरस छिपाई गई है।
कार में था फिल्मी अंदाज वाला गुप्त स्टोर
जब पुलिस ने गाड़ी की तलाशी शुरू की तो पहली नजर में सबकुछ सामान्य लगा। सीटें डैशबोर्ड, केबिन सबकुछ बिल्कुल साफ लेकिन असल खेल था कार के दरवाजों के अंदर। तस्करों ने बेहद चालाकी से कार के पिछले दरवाजों के अंदरूनी हिस्सों में बॉक्स स्टोर बनाए थे। बाहर से देखने पर कोई बता नहीं सकता था कि अंदर पैकेट रखे होंगे। पुलिस ने जब आरोपी से दरवाजा खोलने को कहा, तक जाकर असली राज सामने आया।
- एक दरवाजे में 12 पैकेट
- दूसरे दरवाजे में 8 पैकेट
कुल मिलाकर 20 पैकेट चरस बरामद हुई। प्रत्येक पैकेट को इस तरह पैक किया गया था कि वह दरवाजे के अंदर की जगह में बिल्कुल फीट बैठ जाए। यह तरीका इतना प्रोफेशनल था कि पुलिस भी हैरान रह गई।
तस्कर कौन थे? पीछे की कहनी और भी चौकती है
तलाशी और बरामदगी के बाद जब दोनों आरोपियों से शक्ति से पूछताछ हुई तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आए।
दोनों ने बताया कि
- 2016 में भी वे मादक पदार्थ की तस्करी में पकड़े जा चुके है।
- 7 साल तक तिहाड़ जेल में बंद रहे।
- रिहाई के बाद उन्होंने फिर से वही पुराना धंधा शुरू कर दिया।
एक तरह सेए कहा जाए तो इन तस्करों के लिए यह धंधा आमदनी का बड़ा साधन बन चुका था। दोनों ने स्वीकार किया कि वे चरस को हिमाचल के कुल्लू जिले में एक व्यक्ति से लेकर आए थे। इसका कंसाइनमेंट फिरोजाबाद के इंदर नामक शख्स को देना था, जिसके बारे में पुलिस अब आगे की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस और ANTF की संयुक्त सफलता
यह पूरी कार्रवाई कमला नगर प्रभारी योगेश कुमार और ANTF टीम की संयुक्त मेहनत का नतीजा है। सूचनाओं को गंभीरता से लिया गए, प्लानिंग की गई और बिना किसी शोर-शराबे के ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
कार्रवाई में शामिल प्रमुख अधिकारी
- उपनिरीक्षक सुमित कुमार
- हरविंद्र मिश्रा
- ANTF टीम के विशेष अधिकारी
इस ऑपरेशन से यह भी साबित हुआ कि पुलिस की निगरानी हाइवे पर लगातार मजबूत हो रही है। आगे ऐसे मामले को और अंजाम दिया जाएगा।
क्या आगे होगा?
पुलिस अब केस के कई पहलुओं की जांच कर रही है।
- हिमाचल का सप्लायर कौन था?
- फिरोजाबाद में डिलीवरी लेने वाला इंदर कौन है?
- क्या इसके पीछे किसी बड़े गिरोह का हाथ है?
- तस्करों ने कितनी बार इस रूट का इस्तेमाल किया?
आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस जल्द ही इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए बड़ी कार्रवाई कर सकती है।
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