Agra News Daily | उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे के बाद अब आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे हादसों का नया हॉटस्पॉट बन गया है | सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी की रिपोर्ट ने एक बार फिर इस मार्ग को “खूनी एक्सप्रेसवे” का नाम दे दिया है | आंकड़े चौंकाने वाले है जनवरी 2021 से सितंबर 2025 तक यानी 57 महीनों में 7024 सड़क हादसे हुए, जिनमें 369 लोगों की मौत हुई और 4264 लोग घायल हुए |
नींद और झपकी से हुई सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट के मुताबिक, इन हादसों में 54.71 प्रतिशत यानी 3843 दुर्घटनाएं ड्राइवर की नींद या झपकी के कारण हुई | लंबी दूरी, रात का सफर और थकान इस एक्सप्रेसवे पर जानलेवा साबित हो रहे है | ट्रक और बस चालकों के अनुसार, इस मार्क पर रात में रोशनी की कभी और विश्राम स्थलों की कभी बड़ी समस्या है | 200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर बहुत कम जनसुविधा स्थल मौजूद है, जिससे ड्राइवर बिना रुके घंटों गाड़ी चलाते रहते है |
तेज रफ्तार और ओवरस्पीडिंग दूसरी सबसे बड़ी वजह
ओवरस्पीडिंग के कारण 690 हादसे ( 9.82% ) और टायर फटने से 628 हादसे ( 8.91% ) दर्ज हुए | हालांकि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कारों की गति सीमा 120 किमी/घंटा तय है, लेकिन हकीकत में कई वाहन 150 किमी/घंटा तक दौड़ते है | तेज रफ्तार के चलते मामूली गलती भी जानलेवा साबित हो रही है |

जानवरों और दोपहिया वाहनों से बड़ी मुसीबत
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 249 हादसे ( 3.54% ) सड़क पर अचानक आ जाने वाले जानवरों की वजह से हुए | वहीं सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि दोपहिया वाहनों की संख्या पांच साल में लगभग 30% बढ़ी है | जनवरी 2020 में जहां 31,361 दोपहिया वाहन इस मार्ग से गुजरे, वहीं जनवरी 2025 तक यह आंकड़ा 40,667 हो गया | सड़क सुरक्षा अधिकारियों ने माना कि हेलमेट न पहनने और तीन सवारियों के साथ चलते की वजह से हादसे बढ़े है |
Agra News Daily: यातायात दोगुना, पर सुरक्षा अधूरी
पिछले पांच वर्षों में एक्सप्रेसवे पर यातायात लभभग दोगुना हो गया है | जनवरी 2020 में जहां 5,45764 वाहन गुजरे थे, वहीं जनवरी 2025 में यह संख्या लगभग 11,16,390 तक पहुंच गई यानी औसतन 36,000 वाहन प्रतिदिन लेकिन इतने वाहनों के बावजूद सुरक्षा उपायों और जनसुविधाओं में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ |
जनसुविधाएं कम, यात्रियों के लिए मुश्किलें ज्यादा
बैठक में बताया गया कि आगरा से लखनऊ की ओर केवल दो स्थानों 105 और 227 किलोमीटर पर जनसुविधा स्थल है, जबकि लखनऊ से आगरा की ओर भी केवल दो 217 और 101 किलोमीटर पर | विशेषज्ञों ने कहा कि यात्रियों के लिए ये सुविधाएं बेहद अपर्याप्त है | Indian Road Congress के मानकों के अनुसार हर 30-40 किलोमीटर पर जनसुविधा स्थल होना चाहिए, जबकि इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर 100 किलोमीटर तक कोई विश्राम स्थल नहीं है |
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने जताई चिंता
24 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में इस रिपोर्ट को पेश किया गया | बैठक में अधिवक्त केसी जैन ने सवाल उठाया कि जब एक्सप्रेसवे पर कारों की गति सीमा 120 किमी/घंटा है, तो क्या दोपहिया वाहनों को चलने की अनुमति होनी चाहिए? केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर दोपहिया, साइकिल और पशु-चलित वाहन पूरी तरह प्रतिबंधित है | बावजूद इसके, कई बार ये वाहन गलती से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते है, जिससे हादसे बढ़ते है |
सर्दियों में गति सीमा घटने की सिफारिश
अधिवक्ता जैन ने सुझाव दिया कि सर्दियों के दौरान, जब कोहरा घना होता है, कारों की गति सीमा 120 से घटाकर 75 किमी/घंटा कर देनी चाहिए | उन्होंने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे की तरह भी गति सीमा को मौसम के अनुसार नियंत्रित करना चाहिए, ताकि ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके |
सरकारी एजेंसियों की सिफारिशें और नए उपाय
यूपी एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ( यूपीडा ) ने बताया कि नई जनसुविधाएं 160 और 165 किलोमीटर माइलस्टोन पर प्रस्तावित है | प्राधिकरण का कहना है कि हर दिशा में कम से कम पांच जनसुविधा स्थल बनाए जाने की योजना है | इसके अलावा CCTV किमी पर एंबुलेंस पोस्ट बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है |
जनवरी 2021 से सितंबर 2025 तक हुए हादसे कारणवार आकंड़ा
1. नींद व झपकी के कारण – 3843 हादसे ( 54.71% )
2. ओवरस्पीडिंग – 690 हादसे ( 9.82% )
3. टायर फटना – 626 हादसे ( 8.91% )
4. जानवरों से टकराव – 249 हादसे ( 3.54% )
5. अन्य कारण – 1616 ( 23%)
लोगों की मांग – बढ़े पुलिस गश्त और रात्रि रोशनी
स्थानीय वाहन चालकों ने कहा कि रात में कई हिस्सों में लाइट बंद रहती है या धुंधली रोशनी होती है | साथ ही पेट्रोलिंग टीमों की कमी के कारण दुर्घटनाओं के बाद शिकायत देर से पहुंचती है | लोगों ने सरकार से मांग की है हर 20 किमी पर नाइट पेट्रोल टीम ड्राइवर हेल्प लाइन नंबर और रिफ्लेक्टर बोर्ड लगाए जाएं |
सरकार की प्राथमिकता बने सुरक्षित एक्सप्रेसवे
अधिवक्ताओं और रोड सेफ्टी विशेषज्ञों ने कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ है | इसे “डेथ हाइवे” की बजाय “सुरक्षित कॉरिडोर” बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए | यदि जनसुविधा स्थल, प्रकाश व्यवस्था और गति नियंत्रण उपायों पर तुरंत काम किया गया, तो आने वाले वर्षों में हादसे काफी हद तक कम हो सकते है |
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