Agra News: उत्तर प्रदेश में जमीन खरीद-ब्रिकी से जुड़े मामलों पर आयकर विभाग ने अब सख्ती शुरू कर दी है। आगरा जिले से शुरू हुई इस बड़ी कार्रवाई ने रियल एस्टेट, जमीन कारोबारी और बड़े निवेशकों में हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में हुई 1000 करोड़ रूपये से अधिक की रजिस्ट्रियों को आयकर विभाग ने रडार पर ले लिया है। इन सौदों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और रजिस्ट्री मूल्य कम दिखाने की आशंका जताई जा रही है।
आगरा बना जांच का केंद्र
आगरा जिले में जमीनों की खरीद-बिक्री लंबे समय से चर्चा में रही है। आयकर विभाग को आशंका है कि कई मामलों में जमीन की वास्तविक बाजार कीमत को छिपाकर रजिस्ट्री में कम दम दिखाया गया है। खासकर किरावली, एत्मादपुर फतेहाबाद और आसपास के इलाकों में बड़े भूखंडों की रजिस्ट्रियां को लेकर गंभीर अनियमिताएं सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, हर महीने करीब 40 से 50 करोड़ रूपये की जमीनों की रजिस्ट्री केवल आगरा और आसपास के क्षेत्रों में होती रही है, लेकिन इनमें से कई सौदे की जानकारी समय पर आयकर विभाग को नहीं दी गई।
30 लाख से ज्यादा की रजिस्ट्रियां जांच के घेरे में
आयकर विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 30 लाख से अधिक की कई रजिस्ट्रियां का पूरा ब्यौरा विभाग को नहीं मिला। नियमों के अनुसार, इतनी बड़ी राशि के लेन-देन की जानकारी अनिवार्य रूप से साझा की जानी चाहिए, लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। अब विभाग न केवल 30 लाख रजिस्ट्रियों की भी दोबारा जांच करने की तैयार में है। यह देखा जाएगा कि कहीं बड़े भूखंडों को छोटे टुकड़ों में बंटकर टैक्स से बचने की कोशिश तो नहीं की गई।
सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से जुटाया गया डेटा
हाल ही में किरावली सब-रजिस्ट्रार समेत कई रजिस्ट्रार दफ्तरों में आयकर विभाग की टीम ने सर्वे कर महत्वपूर्व दस्तावेज और डिजिटल डेटा अपने कब्जे में लिया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों की सभी रजिस्ट्रियों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। इस डेटा को राजस्व विभाग, स्टांप एवं पंजीयन विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों से मिलान किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को चिन्हित किया जा सके।

खरीदार और विक्रेता दोनों को नोटिस की तैयारी
इस पूरे मामले में खास बात यह है कि आयकर विभाग केवल जमीन बेचने वालों पर ही नहीं, बल्कि जमीन खरीदने वालों पर भी कार्रवाई कर सकता है। जिन मामलों में रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक लेन-देन में बड़ा अंतर पाया जाएगा, वहां दोनों पक्षों को नोटिस भेजे जाएंगे। सूत्रों की माने तो जल्द ही दर्जनों लोगों को आयकर विभाग की ओर से नोटिश मिल सकता है। उनके यह पूछा जाएगा कि जमीन खरीदने या बेचने के लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था और क्या उस पर सही तरीके से टैक्स चुकाया गया है या नहीं।
ऑनलाइन टैक्स आकलन से पकड़ी जा रही गड़बड़ियां
आयकर विभाग अब ऑनलाइन टैक्स असेसमेंट और डेटा एनालिटिक्स का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है। जमीन की खरीद-ब्रिकी के बाद टैक्स भुगतान का ऑनलाइन आकलन किया जा रहा है, जिससे लेन-देन में हुई गड़बड़ियों को आसानी से पकड़ा जा सके। डिजिटल सिस्टम के जरिए बैंक ट्रांजेक्शन, रजिस्ट्री डेटा और आयकर रिटर्न का मिलान किया जा रहा है। इससे उन मामलों की पहचान हो रही है, जहां आय और संपति में बड़ा अंतर नाचार आ रहा है।
ईमानदार लोगों को घबराने की जरूरत नहीं
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने जमीन की खरीद-ब्रिकी में सही मूल्य दिखाया है और टैक्स नियमों का पालन किया है, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। करवाई केवल उन्हीं मामलों में होगी, जहां जानबूझकर टैक्स चोरी की गई है या गलत जानकारी दी गई है। आयकर विभाग की यह मुहिम अभी शुरुआती दौर में है। आने वाले समय में और जिलों के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से डेटा जुटाया जाएगा। बड़े सौदों पर विशेष नजर रखी जाएगी। और जरूरत पड़ने पर क्षेत्रों की कार्रवाई भी की जा सकती है।
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