Agra News: आगरा के ऐतिहासिक राजामंडी बाजार में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर मार्केट की पैमाईश शुरू की। वर्षों से विवादों में रहे इस बाजार में सड़क की भूमि पर अतिक्रमण, अवैध निर्माण और भारी-भरकम किराया वसूली के आरोप लगाते रहे है। ताजा करवाई के बाद करीब 60 दुकानों और उनके ऊपर बने होटल व ध्वस्त होगा।
राजामंडी बाजार आगरा के सबसे पुराने और व्यस्त व्यापारिक इलाकों में गिना जाता है। यहां स्थित मार्केट को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं कि बाजार की सड़क पर कब्जा कर दुकानों का निर्माण किया गया और बाद में ऊपर होटल तथा शोरूम खड़े कर दिए गए। आरोप है कि नगर निगम से पट्टा निरस्त हो जाने के बावजूद दुकानदारों से मोटा किराया वसूला जा रहा है। इस पूरे मामले ने जब कानूनी रूप लिया तो याचिका सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट आदेश दिए कि विवादित भूमि की स्थिति राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाए। अदालत ने आदेश दिया कि यदि रिकॉर्ड में भूमि सड़क के ऊपर है, तो उसे हर हाल में खाली कराया जाए और सार्वजनिक मार्ग को चालू किया जाए। इस आदेश का पालन करते हुए मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम फीता लेकर राजामंडी बाजार पहुंची और पैमाइश की प्रक्रिया शुरू की। पैमाइश के दौरान बाजार में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में दुकानदार, व्यापारी और स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। कई दुकानदारों ने कार्रवाई का विरोध भी किया, जबकि प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को संभालते नजर आए। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को भी तैनात किया गया था।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने फुटपाथ से लेकर दुकानों की दूरी नापी और नक्शों से मिलान किया। टीम ने यह जानने की कोशिश की कि किरायेदारी शुरू होने से पहले सरकारी रिकॉर्ड में वहां सड़क की कितनी चौड़ाई दर्ज थी और वर्तमान में वास्तविक स्थिति क्या है। अधिकारियों का कहना है कि पैमाइश की पूरी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस मामले में दुकानदारों की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता दुकानदारों का कहना है कि वे दशकों से यहां व्यापार कर रहे हैं और उन्हें विधिवत रूप से दुकानें आवंटित की गई थीं। दुकानदरने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पट्टे की वैधता और सड़क की जमीन पर कब्जे के आरोपों को चुनौती दी है। उनके अधिवक्ता बलविंदर सिंह के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सड़क के रूप में दर्ज पाई जाती है, तो उसे खाली कराना अनिवार्य होगा।
स्थानीय व्यापारियों में इस कार्रवाई को लेकर चिंता का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि यदि 60 दुकानों और ऊपर बने होटल को ध्वस्त किया गया तो सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
राजामंडी बाजार पहले भी अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर सुर्खियों में रहा है। शहर के अन्य इलाकों में हुए अतिक्रमण विरोधी अभियानों की तरह यहां भी प्रशासन सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप अवैध निर्माण चिह्नित होते हैं तो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है फिलहाल राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट अगला आदेश देगा। तब तक राजामंडी बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। दुकानदारों की नजर अदालत के फैसले पर टिकी है, जबकि प्रशासन नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की बात कह रहा है। यह मामला न सिर्फ राजामंडी बाजार बल्कि पूरे शहर के लिए एक नजीर बन सकता है, जहां सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सख्त संदेश जाएगा।
Agra Crime News: शराब के लिए पैसे न देने पर बड़े भाई ने छोटे भाई की ले ली जान







