Agra News: आगरा शहर के सिकंदरा थाना क्षेत्र के शास्त्रीपुरम इलाके में शुक्रवार को जब एक रिटायर्ड इंजीनियर का शव उनके ही फ्लैट के अंदर बिस्तर पर पड़ा मिला। मृतक की पहचान 78 वर्षीय शैलेंद्र कुमार के रूप में हुई है, जो लंबे समय से अकेले रह रहे थे। पड़ोसियों को जब लगातार दो दिन तक फ्लैट से कोई हलचल या आवाज नहीं सुनाई दी, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने पर शास्त्रीपुरम पुलिस चौकी प्रभारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा खुलवाया तो अंदर का नजारा देख सभी हैरान रह गए। शैलेंद्र कुमार अपने बेड पर मारे हुए पाए गए। कमरे में किसी भी तरह की तोड़फोड़ या कोई भी निशान नहीं थे, जिससे मामला प्राकृतिक मौत का प्रतीत हो रहा है।
ऑनलाइन मंगवाते थे दवाइयां और भोजन
पुलिस और पड़ोसियों के अनुसार शैलेंद्र कुमार रोजाना की तरह जरूरतों के लिए बाहर कम ही निकलते थे। वह अपनी दवाइयां और भोजन अधिकतर ऑनलाइन माध्यम से मंगवाते थे। शुक्रवार से शनिवार दोपहर 12 बजे तक जब किसी प्रकार की कोई आवाज फ्लैट से नहीं आई, तो आसपास के लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई।
परिवार में केवल एक बेटा, सेना में तैनात
मृतक के परिवार में केवल एक बेटा है, जो पुणे में सेना सेवा में तैनात बताया गया है। पुलिस ने बेटे को घटना की जानकारी दे दी है। परिजनों के आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी की जाएगी। बताया गया है कि शैलेंद्र कुमार शिवम एलिगेंट अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 505 में रहते थे। वह पेशे से रिटायर्ड इंजीनियर थे और काफी समय से अकेले जीवन बिता रहे थे। पड़ोसियों का कहना है कि वह बेहद शांत स्वभाव के थे और किसी से अधिक बातचीत नहीं करते थे।
Agra News: पड़ोसियों ने जताई चिंता
स्थानीय निवासियों ने बताया कि शैलेंद्र कुमार अकेलेपन से जूझ रहे थे। उर्म बढ़ने के साथ उनकी सेहत भी लगातार गिर रही थी। कई बार उन्हें दवाइयों के सहारे दिन गुजारते देखा गया था। हालांकि वह किसी से मदद मांगने में भी हीच खींचते थे। पड़ोसियों का कहना है कि अगर समय रहते उनकी तबियत की जानकारी मिल जाती, तो शायद उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सकता था।
पुलिस बोली, बुजुर्गों पर बढ़ेगा ध्यान
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि यह मामला एक बुजुर्ग के अकेले रहने से जुड़ा हुआ है। उन्होंने थाना स्तर पर बीट सिपाहियों को आदेश दिए हैं कि ऐसे बुजुर्ग, जो अकेले रहते हैं, उनकी समय-समय पर जानकारी ली जाए और उनकी समस्याओं पर नजर रखी जाए। पुलिस का कहना है कि शहर में कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनके बच्चे बाहर नौकरी करते हैं और वे अकेले रह जाते हैं। ऐसे मामलों में समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि समय रहते मदद पहुंचाई जाए।
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