EPFO Persion Rules: प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से हर महिले PF की रकम कटती है। इसी योगदान का एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS 95 में जाता है। अगर करचारी ने तय अवधि तक पेंशन सेवा पूरी की है, तो रिटायरमेंट के बाद उसे हर महिले पेंशन मिल सकती है। रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिलेगी, यह मुख्य रूप से पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा पर निर्भर करता है। EPFO के नियमों में पेंशन की गणना के लिए एक निर्धारित फॉर्मूला है।
PF का पैसा कैसे बनाता है पेंशन?
कर्मचारी के PF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की तरह से योगदान होता है। नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPS यानी पेंशन फंड में जाता है। सामान्य स्थिति में नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा EPS से जुड़ा होता है। इसका मतलब यह है कि PF खाते में दिखाई देने वाली पूरी रकम रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त मिलने वाली राशि नहीं होती। उसका एक हिस्सा भविष्य की पेंशन से जुड़ा होता है। हालांकि, पेंशन की वास्तविक राशि केवल PF खाते में जमा रकम देखकर नहीं निकाली जा सकती। इसके लिए पेंशन योग्य वेतन और सेवा अवधि को ध्यान में रखा जाता है।
10 साल की नौकरी जरूरी
EPS के तहत सामान्य रिटायरमेंट पेंशन के लिए कर्मचारी की कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा होना जरूरी है। 58 साल की उम्र पूरी होने पर पात्र कर्मचारी को सुपर एन्युएशन पेंशन मिल सकती है। अगर कर्मचारी 58 साल से पहले पेंशन लेना चाहता है, तो इसके लिए अलग नियम हैं। 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन ली जा सकती है, लेकिन इसमें पेंशन की राशि कम हो जाती है।
पेंशन की गणना का फॉर्मूला क्या है?
EPS पेंशन की गणना के लिए सामान्य फॉर्मूला इन प्रकारहै:
मासिक पेंशन = पेंशन योग्य वेतन x पेंशन योग्य सेवा ÷ 70
EPFO के नियमों में पेंशन योग्य वेतन की सीमा और सेवा अवधि के आधार पर पेंशन तय होती है। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि पेंशन योग्य वेतन सामान्य तौर पर वह वेतन है जिसे EPS के नियमों के तहत गणना में लिया जाता है। इसलिए किसी कर्मचारी की वास्तविक मासिक सैलरी 15,000 रूपये से ज्यादा होने पर भी सामान्य EPS गणना में हर स्थिति में पूरी सैलरी नाही जोड़ी जाती।
उदाहरण से समझिए (EPFO Pension Rules)
मान लीजिए किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रूपये है और उसकी पेंशन सेवा 50 साल है।
15,000×50 ÷ 70 = 10,714 रूपये इस हिसाब से कर्मचारी की अनुमानित मासिक पेंशन करीब 10,714 रूपये बंटी है। यानी 58 साल की उम्र में पात्रता पूरी होने पर इस उदाहरण के आधार पर लभभग 10,714 रूपये मासिक पेंशन का आंकड़ा निकलता है। धान रखें की यह समझने के लिए उदाहरण है। वास्तविक पेंशन की गणना कर्मचारी की सेवा अवधि, रिकॉर्ड और लागू EPS नियमों के आधार पर EPFO करता है।
50 साल में पेंशन लेने पर कितना नुकसान?
EPS में 58 साल से पहले पेंशन लेने का विकल्प मौजूद है। लेकिन अर्ली पेंशन लेने पर हर साल के लिए पेंशन में 4 प्रतिशत की कमी लागू होती है। यह सुविधा 50 साल की उम्र से उपलब्ध है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति 58 साल की बजाय 57 साल की उम्र में पेंशन शुरू करता है, तो निर्धारित नियम के अनुसार एक साल की कमी के लिए 4 प्रतिशत की कटौती होगी।
अगर 56 साल की उम्र में पेंशन ली जाती है तो 58 साल से दो साल पहले पेंशन शुरू होगी और संबंधित कटौती लागू होगी। इसलिए नौकरी से बाहर निकलने के बाद तुरंत पेंशन शुरू करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उम्र बढ़ने तक इंतजार करने पर कितनी ज्यादा पेंशन मिल सकती है।
क्या 58 साल तक नौकरी करना जरूरी है?
नहीं। 58 साल की उम्र तक नौकरी करना जरूरी नहीं है, लेकिन EPS के तहत पूरी पेंशन के लिए निर्धारित पात्रता और उम्र की शर्तों को पूरा करना होता है अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल या उससे ज्यादा की पात्र सेवा पूरी कर ली है और वह 58 साल की उम्र पूरी करता है, तो वह सुपर एन्युएशन पेंशन के लिए पात्र हो सकता है। वहीं 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन लेने पर पेंशन में निर्धारित कटौती होती है।
पेंशन लेते समय यह गलती न करें?
कई कर्मचारी यह मान लेते हैं कि PF खाते में जितनी रकम जमा है, उसी के आधार पर पेंशन तय होगी। ऐसा नहीं है। EPS पेंशन की गणना के लिए अलग नियम और फॉर्मूला लागू होता है। इसके अलावा, कर्मचारी को अपनी पेंशन योग्य सेवा और EPFO रिकॉर्ड भी जांच लेना चाहिए। सेवा अवधि में अंतर होने पर पेंशन की गणना प्रभावित हो सकती है। EPFO की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 58 साल की उम्र के बाद पेंशन को आगे टालने का विकल्प भी कुछ परिस्थितियों में उपलब्ध है। नियमों के तहत 58 से 60 साल के बीच पेंशन टालने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार पेंशन में वृद्धि हो सकती है।
नौकरी बदलने पर क्या होगा?
प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग अक्सर नौकरी बदलते रहते है। ऐसे में अलग-अलग कंपनियों में किया गया पात्र EPS सेवा योगदान महत्वपूर्व होता है। इसलिए नौकरी बदलते समय PF और EPF से जुड़े रिकॉर्ड को सही रखना जरूरी है। आगरा आपकी पुरानी और नई नौकरी EPFO के दायरे में आती है, तो सेवा रिकॉर्ड को सही तरीके से जोड़ना भविष्य में पेंशन गणना के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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