Agra News: आगरा शहर में लगातार सामने आ रहे भवन ध्वस्त और अवैध निर्माण से जुड़े हादसों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। माईथान, किनारी बाजार, बेलनगंज, मंटोला और अन्य धनी आबादी वाले इलाकों में जर्जर भवनों और बिना मानकों के हो रहे निर्माण कार्य लोगो की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसों के बाद नोटिस जारी किए जाते है, एफआईआर भी दर्ज होती है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती।
हादसों से नहीं लिया गया सबक
पिछले कुछ वर्षों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में भवन गिरने और निर्माण कार्य के दौरान कई गंभीर हादसे हो चुके है। इसके बावजूद अवैध निर्माण ओर जर्जर इमारतों की पहचान के बाद भी उन्हें हटाने या सुरक्षित करने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। ऐसे में बाजारों और रिहाइशी क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि संबधित विभागों की ओर से नोटिस जारी करने और चेतावनी देने की औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, लेकिन इसके बाद कार्रवाई धीमी पड़ जाती है। कई मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाते, जिससे नियमों की अनदेखी करने वालों के हौंसले बढ़ते है।
पुराने हादसे आज भी याद: (Agra News)
जनवरी 2023 में माईथान क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। बेसमेंट की खुदाई के कारण आसपास के कई मकान प्रभावित हुए थे और एक मासूम की जान चली गई थी। इस घटना के बाद जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन शहर में अवैध निर्माण की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। इसके अलावा किनारी बाजार और बेलनगंज क्षेत्र में भी भवनों के कमजोर होने और निर्माण कार्य के दौरान नुकसान की घटनाएं सामने आ चुकी हैं कई मामलों में समय रहते लोगों को बाहर निकल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया
घनी आबादी वाले बाजारों में बढ़ी चिंता
माईथान, मंटोला, किनारी बाजार और आसपास क्षेत्रों में प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी और कारोबार के लिए पहुंचते हैं इन इलाकों में कई पुराने भवन अब भी खड़े है, जिनकी स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे है विशेषज्ञों का मानना है कि जर्जर बवाना का समय पर सर्वे और आवश्यक कार्रवाई नहीं होने पर भविष्य में बड़े हादसों की आशंका बनी रह सकती है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक, जर्जर भवनों की नियमित जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समयबद्ध करवाई आवश्यक है।







