Agra News: कलेक्ट्रेट परिसर से सटी करोड़ों रूपये की बेशकीमती जमीन पर कथित कब्जे के मामले में नया मोड़ आया है। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब में अंजुमन मोहम्मदिया ट्रस्ट की ओर से एसीएम तृतीय न्यायालय में जवाब दाखिल कर दिया गया है। ट्रस्ट प्रतिनिधि हाजी जमीलुद्दीन ने जमीन से जुड़े दस्तावेज और अन्य सबूत भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए है। प्रशासन की ओर से इस मामले में नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए 14 सितंबर तक का समय दिया गया था। तय समय सीमा के भीतर ट्रस्ट की ओर से अपना पक्ष रखा गया। अब मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को एसीएम तृतीय न्यायालय में होगी।
ट्रस्ट ने प्रशासन के दावे पर उठाए सवाल
ट्रस्ट की ओर से प्रशासन के जमीन पर कब्जे के दावे पर सवाल उठाए गए है। ट्रस्ट प्रतिनिधि का कहना है कि जमीन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उनके पास मौजूद है और इन्हें न्यायालय में पेश किया जा चुका है। ट्रस्ट की ओर से यह भी दावा किया गया है कि कलेक्ट्रेट परिसर भी वक्फ बोर्ड की जमीन पर बना है। इसके साथ ही ट्रस्ट प्रतिनिधि ने दावा किया कि प्रशासन की ओर से वषों तक इस जमीन का किराया दिया जाता रहा है। उनका कहना है कि जिलाधिकारी भी उनकी जमीन पर किरायेदार की स्थिति में रहे है। हालांकि, इन दावों पर अंतिम स्थिति न्यायालय में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

करीब 9 हजार वर्ग गज जमीन पर कब्जे का आरोप
प्रशासन की जांच के मुताबिक कलेक्ट्रेट परिसर से सटी करीब 9,080 वर्ग गज सरकारी जमीन पर कथित कब्जा पाया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस जमीन पर करीब 42 दुकानें, दो स्कूल और एक धार्मिक स्थल संचालित हो रहे हैं। इसी मामले में अंजुमन मोहम्मदिया ट्रस्ट के प्रतिनिधि समेत कुल 14 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस में जमीन खाली करने के साथ करीब 30 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भी उल्लेख किया गया है।
21 सितंबर की सुनवाई पर नजर (Agra News)
अब ट्रस्ट की ओर से जबाव और दस्तावेज दाखिल किए जाने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई को लेकर अपना रुख स्पष्ट करेगा। यदि प्रशासन ट्रस्ट के जवाब और प्रस्तुत दस्तावेजों से संतुष्ट नहीं होता है तो जमीन खाली कराने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को एसीएम तृतीय न्यायालय में होनी है। इस सुनवाई में प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से रखे गए दावों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होने की उमीद है।






