Agra News: नगर निगम आगरा में मेयर और नगर आयुक्त के बीच चल रहा टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं दूसरी ओर नगर निगम के कर्मचारी नगर आयुक्त के समर्थन में उतर आए है। दोनों पक्षों के आरोप प्रत्यारोप के बीच नगर नियम की कार्यप्रणाली और शहर के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
मेयर ने लगाए भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप
मेयर ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में नगर आयुक्त पर वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सदन की अवमानना के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम की धाराओं का दुरुपयोग करते हुए अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। मेयर के अनुसार, कई विकास कार्यों के प्रस्तावों को जानबूझकर रोका गया, जिससे पार्षदों और जनता में नाराजगी बढ़ी है। पत्र में यह भी कहा गया कि पार्षदों द्वारा पारित निंदा प्रस्ताव के बावजूद नगर आयुक्त ने अपनी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं किया। मेयर ने शासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
सदन केi बैठक में हुआ हंगामा
नगर निगम सदन की बैठक में भी इस विवाद की झलक साफ दिखाई दी। बैठक के दौरान नगर आयुक्त की अनुपस्थिति को लेकर कई पार्षदों ने विरोध जताया। मेयर ने इसे सदन का अपमान बताया और कहा कि नगर निगम के इतिहास में यह काला दिन है जब प्रमुख अधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए। पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों की अनदेखी हो रही है और 50-50 लाख रुपये तक के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। 15वें वित्त आयोग से जुड़े प्रस्तावों पर भी कार्रवाई न होने को लेकर नाराजगी जताई गई।
कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब नगर निगम के कर्मचारी नगर आयुक्त के समर्थन में उतर आए। कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया और पार्षदों द्वारा निंदा प्रस्ताव का विरोध किया। चपरासी से लेकर क्लर्क और अधिकारियों तक ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। कर्मचारियों का कहना है कि नगर आयुक्त प्रशासनिक नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं और उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित किया जा रहा है।
नगर आयुक्त ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने मेयर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यालय को बैठक आयोजित करने के संबंध में कोई लिखित निर्देश नहीं मिला था। उन्होंने बताया कि 13 मार्च को बजट बैठक कराने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका था। नगर आयुक्त के अनुसार, शहर के विकास के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पास होना बेहद जरूरी है, लेकिन संसद के बजट सत्र के चलते बैठक कराने में प्रशासनिक अड़चनें थीं। उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में ही बैठक संभव होती है और इस संबंध में मेयर को पत्र भेजकर निर्देश मांगे गए थे, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
बजट पास न होने से विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका
नगर निगम का बजट पास न होने से शहर के कई महत्वपूर्ण विकास कार्य अटक सकते हैं। सड़क, जलनिकासी, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट बजट पर निर्भर होते हैं। यदि समय पर बजट पारित नहीं हुआ तो इन योजनाओं में देरी तय मानी जा रही है। नगर निगम जैसी संस्थाओं में प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है। टकराव की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।
जनता की नजरें शासन के फैसले पर (Agra News)
अब इस पूरे मामले में सबकी नजरें राज्य सरकार पर टिकी हैं। मेयर द्वारा मुख्यमंत्री से की गई शिकायत के बाद शासन स्तर पर जांच या हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है। यदि जांच बैठती है तो दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई सामने आ सकती है। आगरा जैसे बड़े शहर में नगर निगम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सफाई, जलापूर्ति, सड़क, पार्क, स्ट्रीट लाइट, कर वसूली और शहरी विकास से जुड़े लगभग सभी कार्य निगम के जिम्मे होते हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर पर टकराव का सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ना तय है।
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