Agra News: आगरा शहर के दवा कारोबार से जुड़ा एक बड़ा खुलासा सामने आया है। औषधि विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान कार्रवाई करते हुए नकली दवाओं के तीन बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि कुछ कारोबारी दवा कंपनियों से सीमित संख्या में असली दवाओं के डिब्बे खरीदते थे और उन्हीं के बैच नंबर तथा क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर अवैध फैक्ट्रियों में हजारों नकली पैक तैयार कर बाजार में सप्लाई करते थे।
10 असली डिब्बों से तैयार किए जाते थे हजारों फर्जी पैक
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि आरोपी दवा कंपनियों से केवल 10 डिब्बे खरीदते थे। डिब्बों पर मौजूद बैच नंबर और क्यूआर कोड की मदद से अवैध फैक्ट्रियों में करीब 1000 नकली डिब्बे तैयार किए जाते थे। बाद में इन दवाओं की सप्लाई उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों तक की जाती थी। औषधि विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि कई प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम पर और पैकेजिंग की नकल कर नकली दवाएं तैयार की जाती थीं। आरोपियों द्वारा असली बिलों का दुरुपयोग कर नकली दवाओं की बिक्री को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी। इससे शुरुआती जांच में फर्जीवाड़े का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
क्यूआर कोड स्कैन होने पर खुला पूरा खेल
मामले का खुलासा तब हुआ जब दवा कंपनी के प्रतिनिधियों ने बाजार में उपलब्ध कुछ संदिग्ध दवाओं के क्यूआर कोड स्कैन किए। जांच में पाया गया कि एक ही बैच नंबर और क्यूआर कोड का उपयोग बड़ी संख्या में नकली पैक पर किया गया था। इसके बाद औषधि विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की और पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच एंजेसियों के अनुसार आरोपी आधा दर्जन से अधिक थोक दवा फर्मों के नाम पर बिल तैयार करते थे। इन्हीं बिलों के आधार पर नकली दवाओं की सप्लाई की जाती थी। जब भी जांच होती, कारोबारी बिल दिखाकर दवाओं को असली साबित करने का प्रयास करते थे। हालांकि गहराई से जांच करने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया।
औषधि विभाग के अनुसार पिछले एक वर्ष के दौरान करोड़ो रूपये मूल्य की संदिग्ध दवाओं को जब्त किया गया है। कई दवा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए गए है। विभाग का कहना है कि नकली दवा कारोबार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त करवाई जारी रहेगी।
अस्पताल सप्लाई के नाम पर भी हुई धोखाधड़ी: (Agra News)
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दवाओं को अस्पताल सप्लाई बताकर बाजार में बेचा गया। इन दवाओं पर नई लेबलिंग कर उन्हें कम कीमत पर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। इसके अलावा एक्सपायरी दवाओं की रि-लेबलिंग कर उन्हें भी बाजार में बेचने की शिकायतें सामने आई हैं। औषधि विभाग का कहना है कि नकली दवाओं के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है।
विभाग ने थोक और खुदरा दवा कारोबारियों को केवल अधिकृत स्रोतों से दवाएं खरीदने और प्रत्येक बैच की जांच सुनिश्चित करने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नकली दवाओं के कारोबार पर पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई जारी रहेगी।
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